Wednesday, June 24, 2015

तुझ से मैं तक


तू मेरी हर सोच में  
तू मेरी हर चाह में 
तू मेरी हर बात में 
तू मेरी हर याद में 
तू मेरी हर फ़िक्र में 
तू मेरे हर ज़िक्र में 

 कभी जो तुझ से निकलूं 
तो  "मैं " तक पहुंचूँ 

© Copyright Renu Vyas


Wednesday, June 10, 2015

मेरी अपनी


कभी ख़याल बन 
मुझे दिन में सताती है 
कभी सपना बन के 
मेरी नींदों में आ जाती है 
कभी धड़कन बन 
मेरे दिल में समाती है 
कभी मीठा सा गीत बन 
मेरे होठों से गुनगुनाती है 
और जो मैं कभी 
ज़िन्दगी में मशरूफ हो जाऊं 
तो चुपके से पीछे आ 
मेरी आखों पे हाथ रख 
हौले से पूछ जाती है 
"बताओ तो मैं तुम्हारी कौन ?"
यह कह कर मुस्कुराती है 

अब इतना अपना कौन होगा भला 
तुम्हारी याद के सिवा....