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Friday, July 24, 2015

अंधेरे



नींद ने मुझसे बेरुख़ी कर ली 
ख़्वाब भी मेरे आजकल नम है 
दोस्त मिला कर मुझसे अंधेरों में कहीं 
सूरज से मेरी अब तो दोस्ती कम है....

© Copyright Renu Vyas