Tuesday, August 04, 2015

मैं एक क़ायनात


मैं माँ की ममता भरी मूरत हूँ 
मैं हूँ बहिन का निःस्वार्थ प्यार 
मैं प्रेमिका की शरारत हूँ 
मैं बेटी का स्नेह और दुलार 

कभी मैं चुपचाप सहने वाली 
कभी हूँ काली का रूप 
कभी पार्वती सी पूजी जाती 
कभी लक्ष्मी का स्वरूप  

कभी ना समझो वो रहस्य हूँ 
कभी सीधी साधी बात 
कभी नदी के चंचल वेग सी 
कभी झील सी गहरी व शान्त 

चंद शब्दों में ना वर्णन हो मेरा 
शब्द भी मेरे लिए हैं अपर्याप्त 
कितने क़िरदार बसते हैं मुझमें  
मैं स्वयं में हूं पूरी क़ायनात 

© Copyright Renu Vyas