Monday, September 26, 2016

रंजिश ही सही..


There are some songs that cause you to pause, listen intently and to embrace. These are the songs that bring a tear to your eye, not because of their sadness, but because of the strong emotional resonance they evoke. Ranjish Hi Sahi, written by Ahmed Faraz and sung by Mehdi Hassan is one such Ghazal.

Music rises above all, be it religion, beliefs or borders, as does our affection for it. Mehdi Hassan was a great musician par excellence. His voice had a wonderful quality, and a uniqueness of its own.The beauty of his Ghazals is that one never tires of them. In fact, the more I hear them, the more they cast this hypnotic spell over me.

Today, as I sit and hear his Ghazal, his magical voice enchants and intoxicates me... gliding effortlessly over my senses, as my heart stays spellbound…experiencing a myriad of emotions from this level to that, like a flower bud that unravels and unfolds gently, layer after layer into a bloom....


रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिये आ

अब तक दिल-ए-खुशफ़हम को हैं तुझ से उम्मीदें
ये आखिरी शम्में भी बुझाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

इक उम्र से हूँ लज्ज़त-ए-गिरया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जां मुझको रुलाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

माना के मोहब्बत का छुपाना है मोहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ
रंजिश ही सही...

जैसे तुम्हें आते हैं ना आने के बहाने
ऐसे ही किसी रोज़ न जाने के लिए आ
रंजिश ही सही...

पहले से मरासिम ना सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रहे दुनिया ही निभाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से खफा है तो ज़माने के लिये आ
रंजिश ही सही...