Tuesday, January 24, 2017

Indifference



All those feelings that went unexpressed
All the words that were left unsaid
Desires that remained unfulfilled
All that we could have had
If not for your  
Indifference 

© Copyright Renu Vyas



अब तक दिल-ए-खुशफ़हम को हैं तुझ से उम्मीदें
ये आखिरी शम्में भी बुझाने के लिये आ...

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिये आ

(अहमद फ़राज़)