कुछ हंसाते हैं खूब
तो कुछ ज़ख्म दे जाते रिश्ते
कुछ में भरा है प्यार
तो कुछ सिर्फ़ रुलाते रिश्ते
कुछ ख़ुशियों का है हार
तो कुछ तार तार रिश्ते
कुछ हंसी कहकहे हैं
तो तकरार हैं कुछ रिश्ते
कुछ फूलों की तरह कोमल
तो एक भार से कुछ रिश्ते
कुछ ज़िंदगी से भरपूर
कुछ मज़ार से हैं रिश्ते
कुछ रंगों से भरे हुए
जैसे बहार रिश्ते
कुछ लफ़्ज़ों की कड़वाहट में
लिपटे शर्मसार रिश्ते
कुछ अपनत्व से भरे हुए
जैसे त्योहार रिश्ते
कुछ बेरुख़ी के मारे
बस बेज़ार से ये रिश्ते
कैसे अजीब रिश्ते
कैसे अजीब रिश्ते….
Copyright Renu Vyas


