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Wednesday, June 22, 2022

रिश्ते



कुछ हंसाते हैं खूब
तो कुछ ज़ख्म दे जाते रिश्ते
कुछ में भरा है प्यार
तो कुछ सिर्फ़ रुलाते रिश्ते

कुछ ख़ुशियों का है हार
तो कुछ तार तार रिश्ते
कुछ हंसी कहकहे हैं
तो तकरार हैं कुछ रिश्ते

कुछ फूलों की तरह कोमल
तो एक भार से कुछ रिश्ते
कुछ ज़िंदगी से भरपूर
कुछ मज़ार से हैं रिश्ते

कुछ रंगों से भरे हुए
जैसे बहार रिश्ते
कुछ लफ़्ज़ों की कड़वाहट में
लिपटे शर्मसार रिश्ते

कुछ अपनत्व से भरे हुए
जैसे त्योहार रिश्ते
कुछ बेरुख़ी के मारे
बस बेज़ार से ये रिश्ते

कैसे अजीब रिश्ते
कैसे अजीब रिश्ते….

Copyright Renu Vyas 












Wednesday, June 08, 2022

चल सखी..


चल सखी आज फिर से
बारिश में नहाएँ
छोड़ ज़माने के सब ताम झाम
बचपन में लौट जाएँ
चल सखी आज फिर से 
बारिश में नहाएँ

सोंधी गीली मिट्टी में
एक प्यारा सा घर बनाएँ
इस बारिश के पानी में दोनो
काग़ज़ की नाव चलाएँ
चल सखी आज फिर से
बारिश में नहाएँ

धुले धुले से  हैं पेड़ परिंदे
ख़ुश्बू मन की कलियों में
पाँव में बांध  बूँदों की नुपुर 
लौटें बचपन की गलियों में
सोच सोच के ही 
मन मेरा अब मुसकाए
चल सखी आज फिर से
बारिश में नहाएँ

ठंडी-ठंडी बौछारें हैं 
बादल हैं घनघोर
हवा के संग उड़े है आँचल
नाचे मेरे मन का मोर
अपनी मस्ती में मगन
दिल ये मेरा गुनगुनाए
चल सखी आज फिर से
बारिश में नहाएँ

इंद्रधनुष की छटा निराली
प्रकृति  ने किया शृंगार
झोंके पवन के थिरक रहे
गा गा कर मेघ मल्हार
मेरे मन को ये सब मिल कर
और भी अब तड़पाएँ
चल सखी आज फिर से
बारिश में नहाएँ

Copyright Renu Vyas 

Wednesday, June 01, 2022

बोलो…तुम कब आओगे ?


मैं अकेली, उपेक्षित, उदास
खड़ी तुम्हारे इंतज़ार में 
बोलो…तुम कब आओगे ?

बेजान हुई आँखों के
आँसू भी सूख चुके हैं
बंजर सी ज़िंदगी में
जाले से उगने लगे हैं
बोलो…तुम कब आओगे ?

राह तकते वर्षों बीते 
टूटे सपनों को सीते सीते
साँसे भी मध्यम पड़ने लगी
इंतजार के घूंट पीते पीते
बोलो…तुम कब आओगे ?

बालों में मेरे अब
सफ़ेदी झलक रही है
चेहरे पे एक थकन
झुरियाँ भी पड़ चुकी है
बोलो…तुम कब आओगे ?

उम्र ढल रही है मेरी
इंतज़ार का सिलसिला अब
ज़्यादा ना चल पायेगा
शरीर भी निढाल है
ना जाने कब साथ छोड़ जाएगा
जो अब भी तुम ना आये
तो प्रेम की सौग़ात कौन लायेगा
बोलो… तुम कब आओगे  ?

Copyright Renu Vyas