Menu - Pages

Sunday, April 27, 2025

Girl In Red And Blue


A sunlit path, a dusty lane,

The scent of summers yet to wane,

A girl in red, in denim blue,

With dreams as wide as the open view.


Sunglasses shield those wondering eyes,

From secrets held in endless skies,

Barefoot hopes and wristwatch dreams,

The world still woven in childhood seams.


A mango plucked, a smile half-grown,

A thousand stories in hands unknown,

Wind in hair, and heart set free,

How far she roamed — how near to me.


Oh, girl of sunshine, dust, and song,

You taught me where I still belong,

In laughter’s lane, in twilight’s hue,

In every fearless thing I do.


I miss you more than words can say,

My younger self — you led the way,

Still walking fields of gold and green,

Still chasing life, forever fifteen.


Copyright Renu Vyas 


Saturday, April 19, 2025

एक सर्द शाम, चाय और मेहदी हसन



कुछ लोग पार्टी में भीड़ के बीच खुद को पा लेते हैं। उनके लिए हँसी, बातचीत, शोर—सब सुकून है। लेकिन मैं उन लोगों में नहीं हूँ।

मुझे सुकून उस सर्द शाम में मिलता है जब बाहर हल्की धुंध हो, कमरे में हल्का-सा अंधेरा, पास में एक गरम चाय की प्याली हो, और हाथ में मेरी पसंदीदा किताब।

पीछे कहीं मेहदी हसन की आवाज़ धीमे-धीमे गूंज रही हो—“गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौबहार चले…”।


पार्टी मेरे लिए कभी सहज नहीं रही। शुरू के 10-15 मिनट तक सब ठीक लगता है। हल्की मुस्कान, कुछ परिचित चेहरे, थोड़ा बहुत हालचाल। लेकिन उसके बाद एक अजीब-सी घबराहट घेर लेती है।

मैं सोचने लगती हूं—अब क्या बात करूं? किससे? क्यों?


बातचीत का दबाव हमेशा भारी लगता है।

“क्या चल रहा है आजकल?”

“नया क्या है?”

इन सवालों के जवाब मेरे पास कभी नहीं होते।

छोटे-छोटे संवाद मुझे थका देते हैं। शायद इसलिए कि मेरे भीतर बातचीत करने की जगह चुप्पी ज़्यादा घर करती है।


मैं उन पलों को ज़्यादा पसंद करती हूं जहाँ कुछ कहने की ज़रूरत नहीं होती।

जहाँ चाय की भाप, किताब के पन्ने और मेहदी हसन की आवाज़ मिलकर एक कहानी कह देते हैं।

कहानी जो सिर्फ मेरे लिए है, मेरे जैसी है—धीमी, ठहरी हुई, और सच्ची।


हर किसी को शोर में मज़ा नहीं आता। कुछ लोग सन्नाटे में भी ज़िंदगी के मायने ढूंढ लेते हैं।

मैं उन्हीं में से एक हूं।


Copyright Renu Vyas 



Monday, April 07, 2025

बायोस्कोप वाला आ गया…






बायोस्कोप वाला आ गया…


जब भी मैं इंडिया छुट्टियों में आती थी मुझे इस एक आवाज़ का हमेशा इंतज़ार रहता था ।

ये आवाज़ जैसे ही गली में गूंजती थी, हम बच्चों की धड़कनें तेज़ हो जाती थीं। खेल-कूद छोड़कर, आधा खाया आम हाथ में लिए, हम दौड़ पड़ते थे—एक-एक सिक्का मुट्ठी में कसकर पकड़े हुए।


वो बायोस्कोप वाला—सर पर लाल पगड़ी, कंधे पर बक्सा, और होंठों पर वही रटा-रटाया सा गाना।

उसका बायोस्कोप रंग-बिरंगे कागज़ों, चमकती झालरों और पुरानी तस्वीरों से सजा होता था। चार–पाँच छेदों वाला वो छोटा-सा बक्सा मानो कोई जादुई खिड़की हो—जहाँ से दुनिया दिखती थी, एकदम अलग।


हम बारी-बारी से झांकते, कोई जल्दी में धक्का देता, कोई अपनी जगह बचाने की कोशिश करता।

और फिर शुरू होता था जादू।


पुरानी फिल्मों के सीन, हाथ से रंगी हुई तस्वीरें, राजा–रानी की कहानियाँ, शेर-जंगल, रेलगाड़ियाँ और मेले—सब कुछ उस छोटे से बायोस्कोप में समाया होता था। साथ में उसकी धीमी-धीमी commentary—जैसे कहानी सुना रहा हो।


असल मज़ा तो उस इंतज़ार में था।

वो एक आवाज़… वो दौड़… वो सिक्का माँगने की मिन्नतें…

और फिर सब कज़िंस के साथ मिलकर वो सब दोबारा बयान करना, थोड़ा सच, थोड़ा अपनी कल्पना मिलाकर।


आज की तेज़ रफ्तार, हाई-डेफिनिशन दुनिया में, शायद ये सब बहुत छोटा लगे।

लेकिन उस बायोस्कोप की खिड़की से हमने एक बड़ी दुनिया देखी थी।


छोटे-छोटे पलों में छुपी थी बड़ी-बड़ी खुशियाँ।

और वो अब भी दिल में कहीं चमकती हैं—जैसे बायोस्कोप की तस्वीरों की चमक।


Copyright Renu Vyas 





Saturday, April 05, 2025

पुरानी हवेलियाँ और घर: मेरी आत्मा की यात्रा


 


पुराने घरों और हवेलियों में एक अनकहा आकर्षण है जो मुझे बार-बार अपनी ओर खींचता है। ये केवल ईंट और पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि समय के धागों से बुनी हुई कहानियाँ हैं। हर बार जब मैं किसी पुराने घर की चौखट पर कदम रखती हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे कोई भूली-बिसरी याद मेरे कानों में फुसफुसा रही है ।


जब मैं किसी पुरानी हवेली में प्रवेश करती हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे समय रुक गया हो। दीवारों से टकराती हल्की सी हवा, लकड़ी की पुरानी खुशबू, और खामोशी में छुपी आवाज़ें—सब मिलकर मुझे किसी और ही युग में पहुँचा देती हैं। मैं अक्सर कल्पना करती हूँ—यहाँ कौन सी औरतें रहती होंगी? क्या उन्होंने भी इन्हीं खिड़कियों से आसमान को निहारा होगा, क्या उनके भी सपने इन दीवारों में समाए होंगे?


पुराने खंभे, लकड़ी के नक्काशीदार दरवाज़े, आँगन की मिट्टी, और आहिस्ता-से चरमराती सीढ़ियाँ—हर चीज़ में एक कहानी छुपी होती है, जो सिर्फ महसूस की जा सकती है।


इन घरों की दीवारों में केवल ईंट नहीं, बल्कि जज़्बात भरे होते हैं। कोई कोना किसी की प्रार्थना का गवाह होता है, तो कोई झरोखा किसी अधूरे प्रेम की कहानी कहता है। मैं जब इन जगहों को छूती हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे कोई पुराना परिचित मुझे अपनी बातों में उलझा रहा हो।


कभी-कभी कोई गुप्त दरवाज़ा दिख जाता है, कोई पुराना संदूक, कोई टूटा हुआ झूमर—और मैं सोचने लगती हूँ कि इन चीज़ों ने किसका जीवन देखा होगा।


इन पुराने घरों की बनावट में जो खूबसूरती है, वह आधुनिक इमारतों में नहीं मिलती। लकड़ी के भारी दरवाज़े, जिन पर हाथों से की गई नक्काशी, एक अलग ही सौंदर्य रचते हैं। हर झरोखा, हर खंभा, जैसे अपने समय का सजीव दस्तावेज़ हो।


आँगन, जहाँ कभी बच्चे खेलते होंगे, महिलाएँ मिल बैठकर बातें करती होंगी, अब भी उन स्मृतियों को समेटे खड़े हैं। यहाँ की दीवारें केवल चुप नहीं हैं, ये बोलती हैं—ध्यान से सुनो तो कहानियाँ खुद-ब-खुद खुलने लगती हैं।


मुझे इन हवेलियों के छोटे-छोटे कोने और नुक्कड़ बेहद भाते हैं। वहाँ बैठकर कुछ देर चुपचाप रहना, किसी अपने के पास होने जैसा महसूस होता है। शायद किसी ज़माने में कोई स्त्री वहीं बैठकर कढ़ाई कर रही हो, या कोई किशोरी खिड़की से चुपके-चुपके बाहर झांक रही हो।


ऐसे कोनों में एक अनकहा अपनापन है—जैसे समय वहीं थम गया हो और सिर्फ आपकी मौजूदगी का इंतज़ार कर रहा हो।


इन पुरानी हवेलियों से मेरा रिश्ता आत्मिक है। मुझे ऐसा लगता है जैसे ये मुझे बुलाती हैं—मेरे अंदर की स्त्री को पहचानती हैं। हर बार जब मैं किसी पुराने घर की चौखट पर खड़ी होती हूँ, तो मेरी आँखें भीग जाती हैं—ना किसी ग़म में, ना किसी खुशी में, बस उस अहसास में कि मैं किसी कहानी का हिस्सा बन गई हूँ।


इन हवेलियों में मैं सिर्फ अतीत को नहीं, बल्कि खुद को खोजती हूँ। मेरी कल्पना, मेरी भावनाएँ, मेरी स्त्री-सुलभ संवेदनाएँ—सब कुछ इन दीवारों के साथ गहराई से जुड़ जाती है।


इन घरों में बसी कहानियाँ मेरी अपनी सी लगती हैं। शायद इसलिए, मैं बार-बार उनके पास लौटती हूँ—हर बार कुछ नया सुनने,  कुछ नया महसूस करने।


Copyright Renu Vyas