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Monday, June 01, 2026

एक नज़्म, एक आवाज़ और मैं

 

कुछ मोहब्बतें इंसानों से नहीं होतीं।


कुछ मोहब्बतें शब्दों से होती हैं। आवाज़ों से होती हैं। उन एहसासों से होती हैं जो बिना छुए, बिना मिले, हमारी रूह में कहीं घर बना लेते हैं।


मेरे लिए ऐसी ही एक मोहब्बत है  गुलज़ार के शब्दों से और भूपिंदर की आवाज़ से।


मैंने न जाने कितनी बार इन पंक्तियों को सुना और पढ़ा है


“नज़्म उलझी हुई है सीने में
मिसरे अटके हुए हैं होठों पर
लफ़्ज़ काग़ज़ पे बैठते ही नहीं
उड़ते फिरते हैं तितलियों की तरह…”


और हर बार ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे ही मन की कोई अनकही बात चुरा कर लिख दी हो।


गुलज़ार सिर्फ़ लिखते नहीं हैं, वे एहसासों को शब्दों का शरीर दे देते हैं। उनकी नज़्मों में बारिश सिर्फ़ बारिश नहीं होती, धूप सिर्फ़ धूप नहीं होती, और ख़ामोशी तो कभी ख़ामोश होती ही नहीं। वह बोलती है, पुकारती है, याद दिलाती है, और कभी-कभी बहुत देर तक हमारे साथ बैठी रहती है।


लेकिन फिर इन शब्दों को जब भूपिंदर की आवाज़ मिलती है, तो कुछ और ही हो जाता है।


भूपिंदर की आवाज़ में एक अजीब-सी थकान है, जैसे ज़िंदगी को बहुत क़रीब से देखा हो। एक नरम उदासी है, जैसे कोई पुरानी याद अब भी दिल के किसी कोने में सांस ले रही हो। उनकी गायकी में कोई दिखावा नहीं, कोई शोर नहीं। बस एक सादगी है, जो सीधे दिल तक पहुँच जाती है।


जब वे गाते हैं


“कब से बैठा हुआ हूँ मैं जानम
सादा काग़ज़ पे लिख के नाम तेरा …”


तो ऐसा लगता है जैसे कोई शायर शाम के धुंधलके में अपने पुरानी लकड़ी के मेज़ पर झुका बैठा हो, सामने सफ़ेद काग़ज़ रखा हो, और सारी दुनिया की कविताएँ लिखने के बाद भी उसे सिर्फ़ एक नाम लिखना सबसे सुंदर कविता लगता हो।


शायद यही वजह है कि मैं इन दोनों के फ़न से इतना जुड़ाव महसूस करती हूँ।


गुलज़ार की नज़्में मुझे हमेशा उन पुराने दिनों में ले जाती हैं जहाँ शामें थोड़ी लंबी होती थीं,  और मोहब्बत को हर वक़्त ज़ाहिर करना ज़रूरी नहीं समझा जाता था। वहीं भूपिंदर की आवाज़ उन यादों पर जैसे कोई मुलायम-सी चादर बिछा देती है।


आज के शोर भरे दौर में, जहाँ हर चीज़ तेज़ी से गुज़र रही है, गुलज़ार और भूपिंदर मुझे ठहरना सिखाते हैं।


एक नज़्म के एक मिसरे पर रुक जाना।


एक आवाज़ में छुपी ख़ामोशी को सुनना।


और यह समझना कि कभी-कभी सबसे मुकम्मल कविता वही होती है जिसमें सिर्फ़ किसी का नाम लिखा हो।


“बस तेरा नाम ही मुकम्मल है
इस से बेहतर भी नज़्म क्या होगी…”


शायद इसी लिए मैं गुलज़ार के शब्दों से और भूपिंदर की आवाज़ से मोहब्बत करती हूँ।


क्योंकि वे मुझे मेरी अपनी ख़ामोशियों से मिलवाते हैं।


Copyright Renu Vyas 



Thursday, December 25, 2025

हम क्या बन गए हैं ?


 हम क्या बन गए हैं ?


हम क्या बन गए हैं, सोचो ज़रा,

अंग्रेज़ी तारीख़ों पर केक काटें,

नव वर्ष मनाएँ, मोमबत्तियाँ जलाएँ,

पर जब क्रिसमस आए द्वार खटखटाने,

उसे तुलसी के नाम से ढक जाएँ।


जन्मदिन भी मनाते हैं कैलेंडर से,

पर त्योहारों में बाँट लेते हैं इंसान।

धर्म की दीवारें इतनी ऊँची कर लीं,

कि पड़ोसी का उत्सव दिखता ही नहीं।


केक की मिठास सबको भाती है,

पर किसी और की खुशी क्यों खलती है ?

क्यों अपने रंगों को ही सच मानकर,

दूसरों के रंगों से आँख चुराते हैं ?


छोटी-छोटी राजनीति में उलझकर,

बड़े रिश्ते तोड़ते चले जाते हैं।

नाम बदल देने से क्या बदलता है,

जब दिलों में नफ़रत बोते जाते हैं ?


क्यों न दीप भी जलें, सितारे भी चमकें,

ईद की सिवैयाँ, क्रिसमस का गीत,

गुरुपर्व की वाणी, होली के रंग

सब मिलकर जीवन बनें एक संगीत।


कौन रोकता है हमें खुश होने से ?

कौन सिखाता है दोष ही ढूँढना ?

अगर प्रेम ही धर्म का सार है,

तो क्यों भूल गए हैं उसे जीना ?


आओ पूछें खुद से आज यही

हम क्या बन गए हैं, और क्यों ?

अगर साथ हँसने में ही जीवन है,

तो साथ मनाने से डर कैसा हो ?


Wednesday, November 26, 2025

Autumn

 Your laughter in the wind,

Your warmth in the golden light 

Autumn never felt real

Until you arrived.


Copyright Renu Vyas 


#AutumnRomance #FallInLove #GoldenSeason #LovePoetry #RomanticVibes

Thursday, November 13, 2025

The Art of Talking to Yourself (Expert Level)



They say talking to yourself is a sign of madness.

I say it’s a sign of management - emotional, mental, and occasionally spiritual.


After all, who else understands my sarcasm, my overthinking, and my highly specific craving for a second round of tea at 9:30a.m.?


I’ve been talking to myself for years now. What started as harmless muttering has evolved into full-blown board meetings. There’s Motivational MeOverthinking MeHungry Me, and Trying-to-Sleep Me.

We don’t always agree, but we do have great attendance.


Motivational Me: “You’ve got this!”

Overthinking Me: “But what if you don’t?”

Hungry Me: “We should eat first.”

Trying-to-Sleep Me: “Can everyone please shut up?”


I’ve realized that self-conversation is the best kind of multitasking — therapy, planning, and entertainment rolled into one.

You can practice arguments you’ll never have, rehearse witty comebacks you’ll never use, and replay embarrassing moments from 2003 with improved dialogue.


And the best part? There’s no judgment. You can contradict yourself mid-sentence and still win the debate.


Sometimes, my inner dialogue gets so dramatic, it deserves background music. 

So, if you ever catch me whispering to myself at odd hours, don’t worry. I’m not losing it - I’m just having a staff meeting with myself.


@Renu Vyas

Sunday, November 09, 2025

द ग्रेट इंडियन वैडिंग

 भारतीय शादी एक grand family project होती है।

दुल्हा-दुल्हन दो लोग, लेकिन फैसले करने वाले दो सौ!

क्योंकि हर शादी में एक “core committee” होती है 

रिश्तेदारों की शादी योजना समिति -

जो बिना पूछे, बिना रुके और बिना थके अपना ज्ञान बाँटती रहती है। (जहाँ हर कोई खुद को event manager, food critic, औरjudge समझता है!)


“सजावट हम बताएँगे”

शादी की प्लानिंग शुरू होते ही कोई एक aunty जी announce करती हैं - “सजावट मैं देख लूँगी।” और फिर उनके सुझाव आते हैं 

“फूल ज़्यादा मत लगाना, allergy हो जाती है।”

“लाल रंग मत रखना, बहुत bold लगता है।”

“नीला रखो, लेकिन गहरा नहीं, हल्का नहीं, बीच वाला।”मतलब शादी नहीं, कलर calibration चल रहा हो! और जो decorator हो, वो अंदर ही अंदर सोच रहा होता है - “मुझे तो बस पैसे दो, सौंदर्य-शास्त्र बाद में।” 😂


“खाने में variety होनी चाहिए” डिपार्टमेंट 

खाने पर तो रिश्तेदारों का पूरा PhD होता है।

“पनीर ज़रूर रखना, लेकिन ज्यादा नहीं।”

“दाल में तड़का ज़्यादा हो गया तो सब्ज़ी हल्की रखना।”“गोलगप्पे होने चाहिए।”

और सबसे ख़ास -

“शादी चाहे जैसी भी हो, गुलाब जामुन गरम ही चाहिए!

मतलब, शादी में अगर रिश्तेदार खुश हैं तो समझो catering पास,

वरना वो एक “ठंडा जामुन” आने वाले दस सालों तक चर्चा में रहेगा! 😆


“Dance कौन करेगा?”

शादी में डांस की चर्चा ऐसे होती है जैसे देश का बजट पास हो रहा हो।

हर कोई कहता है - “हम तो बस audience हैं”,

और DJ जैसे ही ‘London Thumakda’ बजाता है,

सभी audience अचानक performer बन जाते हैं!

किसी की साड़ी अटकती है, कोई स्टेप भूल जाता है,

और कोई आंटी जी तो ऐसे घूमती हैं जैसे ड्रोन कैमरा उन्हीं पर फोकस है।

फिर भी, सबसे ज़्यादा energy उन्हीं रिश्तेदारों में होती है

जो एक मिनट पहले बोले थे - “हम तो अब बूढ़े हो गए।” 😂


“फोटो ऐसे लो! डिपार्टमेंट ”


अब रिश्तेदारों की नई फील्ड -photography direction!

“मेरा फोटो अकेला लो।”

“अब हम सबका ग्रुप वाला लो, लेकिन मुझे सेंटर में रखो।”

“अब एक ऐसे लो जैसे candid हो।”

और जब फोटो दिखाओ तो कहते हैं - “इतने मोटे लग रहे हैं, filter लगाना था!”

मतलब, रिश्तेदार कभी फोटो में खुश नहींबस फोटो वाले पर गुस्सा रहते हैं!


गुस्सैल एवं मुँह फुलाई विभाग”

ये वो लोग हैं जो पूरे function में चेहरे पर “Breaking News” वाली गंभीरता लिए घूमते हैं।

DJ पर सब नाच रहे हैं, ये किनारे खड़े हैं -

“आजकल के बच्चे तो बस मस्ती करते हैं, संस्कार नाम की चीज़ बची ही नहीं।”

फोटो में जबरन मुस्कुराने को कहो तो -

“हम दिखावे में विश्वास नहीं रखते।” 😐


“Fault-finding विशेषज्ञ”

इनका radar हर कमी पकड़ लेता है -

“बारात देर से आई।”

“DJ ने पुराना गाना बजाया।”

“भाई, मिठाई का रंग थोड़ा फीका लग रहा था।”

“देखा? दुल्हन की माँ ने हमें personally thanks नहीं कहा।”

कभी-कभी लगता है, अगर “Negative Observation Olympics” होता, तो ये रिश्तेदार Gold, Silver, और Bronze — तीनों अपने ही परिवार में बाँट लेते! 😂


“दूल्हा-दुल्हन को सलाह विभाग”

शादी ख़त्म हुई नहीं कि रिश्तेदारों की marital advice factory शुरू हो जाती है -

“दुल्हन, सबको खुश रखना।

“दूल्हे, गुस्सा मत करना।”

“पति-पत्नी में झगड़ा न हो।”

और ये सब कहते वो लोग जिनकी अपनी शादी का इतिहास Netflix series बन सकता है! 😅


“नाराज़गी समिति – शादी की सच्ची आत्मा”

कुछ रिश्तेदारों की मौजूदगी बिना शादी अधूरी है -

क्योंकि हर फंक्शन में वो मिलेंगे, जो नाराज़व्यस्त और आलोचनात्मक रहते हैं।

“किसी ने हमें properly invite नहीं किया।”

“फूलों की खुशबू से सर दर्द हो गया।”

“संगीत बहुत loud था।”

“हमारे कपड़े तो ब्रांडेड नहीं थे ”

“हमारी और तो किसी ने ध्यान ही नहीं दिया”

मतलब शादी हो या ग्रहण — मूड एक ही रहता है: सब गलत कर रहे हैंसिवाय हमारे। 😄


निष्कर्ष: शिकायतें Unlimited, प्यार थोड़ा-थोड़ा

भारतीय शादी का असली स्वाद रिश्तेदारों की वजह से ही है - उनकी राय, उनकी नाराज़गी, उनका ड्रामा - सब मिलकर बनाते हैं वो chaos, जो यादों में सालों तक हँसी बनकर रहता है।

क्योंकि सच यही है - रिश्तेदार शादी की तरह ही हैं,

थोड़े परेशान करते हैं, लेकिन बिना उनके मज़ा भी नहीं आता! 💕


@Renu Vyas