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Monday, February 06, 2023

क्यों आती नही अब चिट्ठियां



कभी हंसाती थी खूब 

तो कभी रुला देती थी 

“छुटियों में मिलने आऊँगी” लिख के

मिलने की उम्मीद जगा देती थी चिठ्ठियाँ


“हम सब यहाँ ठीक हैं”, 

ये दिलासा दे जाती थी 

सभी बड़ों को प्रणाम, छोटों को प्यार लिख

चेहरों पे मुस्कान ले आती थी चिठ्ठियाँ


कभी “जल्दी ही मनी ऑर्डर भेज दूँगा”

एक आश्वासन दे जाती थी 

तो कभी राखी पर चावल कुमकुम 

अपने साथ लिये आ जाती थी चिठ्ठियाँ


“माँ बाबा का बहुत ध्यान रखना”

ये समझाने जो आ जाती थी

“तुम सब की बहुत याद आती है”

वो स्नेह व प्यार वाली चिठ्ठियाँ


डाकिये की आवाज़ पे दौड़ के 

किवाड़ की ओट से उठाई

ज़ोर ज़ोर से पढ़ के भी सुनाई

सबको साथ बिठाने वाली चिठ्ठियाँ


ना जाने कैसे और कहाँ खो गई 

वो हम और आप को जोड़ती

हाल अब किसी का बताती नही

पता नही क्यो आती नही है चिट्ठियां…


Copyright Renu Vyas 

Friday, February 03, 2023

WHO AM I ?

 

WHO AM I ?


I am 

An amalgamation 

Of other people’s 

Opinions

Expectations 

And definitions 

Nothing of me

Is original any more

Buried beneath 

The layers of

Society’s norms

Rights and wrongs 

Compared often

Challenged each day

And categorised

Yes, I have been 

Labelled

And classified 

And oh so totally 

Socialised

They defined me

Therefore 

I am 


Copyright Renu Vyas 



Thursday, February 02, 2023

नये दौर के रिश्ते



हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


मिलते नहीं अपनों से ज़्यादा 

दूर दूर ही रहते हैं

रिश्तेदारों पे शक करते

ख़ुद में ही सिमटे रहते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


जन्मदिन की शुभकामना भी

व्हाट्सएप पर लिख देते हैं

मन में ख़ुशी के भाव नहीं 

पर फ़र्ज़ अदा कर लेते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


विवाह पत्री भी हुई पुरानी 

अब इस बहाने भी क्यों मिलें

तार तार हुए रिश्तों को

कोई फिर से भला अब क्यूँ सिले

चलो ई कार्ड ही लिख देते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


किसने कितना खर्च किया

ये सब दिमाग़ में रखते हैं

इंसान की नेकी नहीं चलती

इज़्ज़त हैसियत से करते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते है


व्हाट्सएप पे परिवार हैं बसते

यहीं से रिश्ते निभते हैं

होली दिवाली हर त्योहार

यहीं पर तो सब सजते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


जो व्हाट्सएप पे ना लिखे 

वो क्या परिवार का हिस्सा हो

फ़ेसबुक , इंस्टा जिसे ना आये 

उसका क्या कोई क़िस्सा हो

ऐसे रिश्तों को हम दरकिनार कर देते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


पहले मय्यत पर जाते थे

या फ़ोन पे सांत्वना देते थे

अब तो वो खेल भी ख़त्म हुआ

फ़ेसबुक पे ही नमन लिख देते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


Copyright Renu Vyas