© Copyright Renu Vyas
चांदनी सर्द रात में
यादों की झुलसती धरती पर
नंगे पाँव चलती मैं
कुछ टूटे बिखरे सपने समेटती
कुछ अधपकी ख्वाइशें बटोरती
कुछ भूली बिसरी यादों में लिपटी
कुछ अधूरी सी बातों में सिमटी
ढूंढती खुद का वजूद मैं
जो खो आई थी कभी
ऐसी ही एक
चांदनी सर्द रात में..
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