कुछ सुन्दर यादें मेरे बचपन की...

वो गर्मीयों की छुट्टियाँ। वो पानी छिड़क कर ठण्डी की हुई गर्म छत की सौंधी खुशबू, घर के सारे लोग और तारों की छाँव, वो रात का खाना छत पे खाना, खाने में मोगर रोटी और कैर के आचार का होना... खाटें लाइन में लगाना फिर देर रात तक फुसफुसा कर बातें करना। रेडियो पर हवा महल, बिनाका गीतमाला सुनना ।
वो गली के नुक्कड़ से चवन्नी का बर्फ लाकर शरबत बना कर पीना,
कोट पीस/चौकड़ी खेलना...किराये की साइकल को बारी बारी चलाना और वो साइकल की चेन का बार बार उतर जाना...
वो माँ/दादी का स्वेटर बुनते वक़्त पास बुला के नाप लेना, और दिवाली पे नए कपड़ो का आना..वो बड़े बुज़ुर्गों का पटाखों के हिस्से करना और वो एक एक पटाखे के लिए लड़ना झगड़ना ...
माँ का नारियल तेल को धूप में रखना और फिर सर में लगा के दो चोटी बनाना, बुआ का उस चोटी के लिए रंगीन रिबन लाना..
कुछ सुन्दर यादें मेरे बचपन की ....
वो गर्मीयों की छुट्टियाँ। वो पानी छिड़क कर ठण्डी की हुई गर्म छत की सौंधी खुशबू, घर के सारे लोग और तारों की छाँव, वो रात का खाना छत पे खाना, खाने में मोगर रोटी और कैर के आचार का होना... खाटें लाइन में लगाना फिर देर रात तक फुसफुसा कर बातें करना। रेडियो पर हवा महल, बिनाका गीतमाला सुनना ।
वो गली के नुक्कड़ से चवन्नी का बर्फ लाकर शरबत बना कर पीना,
कोट पीस/चौकड़ी खेलना...किराये की साइकल को बारी बारी चलाना और वो साइकल की चेन का बार बार उतर जाना...
वो माँ/दादी का स्वेटर बुनते वक़्त पास बुला के नाप लेना, और दिवाली पे नए कपड़ो का आना..वो बड़े बुज़ुर्गों का पटाखों के हिस्से करना और वो एक एक पटाखे के लिए लड़ना झगड़ना ...
माँ का नारियल तेल को धूप में रखना और फिर सर में लगा के दो चोटी बनाना, बुआ का उस चोटी के लिए रंगीन रिबन लाना..
कुछ सुन्दर यादें मेरे बचपन की ....
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