कल रात एक सांवली सी लड़की बहुत याद आई
मैं चुपके से फिर एक बार अपने बचपन में लौट आयी. .
मिली मुझे एक बार फिर वो मासूम सी परी
थोड़ी शरारती , थोड़ी नादान , पर बातों की खरी
बुनती थी सुन्दर सपने , रहती खयालों में घिरी
ज़माने की सच्चाई को वो कहाँ कभी समझ पायी
कल रात वो सांवली सी लड़की बहुत याद आयी..
मन हुआ उसे झंझोड़ के मैं हकीकत को बताऊँ
आँखों पे पड़ा सुनहरा पर्दा खींच के हटाऊँ
ख्वाबों की हसीं नींद से उसको मैं जगाऊँ
पर लाचार, ठगी सी, मैं कुछ भी तो ना कर पायी
कल रात वो सांवली सी लड़की बहुत याद आयी. .
दिल चाहा कि उसे मैं अपना परिचय दे आऊं
उसका हूँ मैं ये आज, ये उसको भी बताऊँ
कब होता है सोचा हुआ, उसको ये समझाऊं
ना कह सकी कुछ भी तो फिर इस आज में लौट आयी
कल रात वो सांवली सी लड़की बहुत याद आयी..
© Copyright Renu Vyas

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