मायके में मैं जब भी जाती
जी भर के वो प्यार लुटाती
माँ सी ही होती है मासी....
माँ की तरह ही वो बतियाती
दुःख सुख में बन जाती साथी
माँ सी ही होती है मासी....
गलती पे वो डांट लगाती
रूठने पर फिर वो मनाती
माँ सी ही होती है मासी....
मेरी याद उसे भी आती
हर पल ये एहसास कराती
माँ सी ही होती है मासी...
याद मैं उसको जब भी करती
आँखें उसकी भी नम हो जाती
माँ सी ही होती है मासी....
काश मेरे भी पंख होते
उस से मैं मिल कर आ जाती
माँ सी ही होती है मासी....
©Renu Vyas

Beautiful
ReplyDeleteThank you Noel
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