ना दिलों में प्यार रहा
ना रिश्तों का कोई मान
गिले शिकवे ढोए जाते
कैसे ये अभिमान
मुरझाई है कलियाँ मन की
सूख गया सब स्नेह
सब के मन में “मैं” बस गया
कैसे बरसे प्रेम
दिन महीने साल बन जाए
जो करे ना कोई उपाय
आवाज़ें फिर देते रहिए
मर के कोई ना आए
Copyright Renu Vyas

Sahi farmaya!
ReplyDeleteLovely photograph too!
Thank you :)
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