हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं
मिलते नहीं अपनों से ज़्यादा
दूर दूर ही रहते हैं
रिश्तेदारों पे शक करते
ख़ुद में ही सिमटे रहते हैं
हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं
जन्मदिन की शुभकामना भी
व्हाट्सएप पर लिख देते हैं
मन में ख़ुशी के भाव नहीं
पर फ़र्ज़ अदा कर लेते हैं
हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं
विवाह पत्री भी हुई पुरानी
अब इस बहाने भी क्यों मिलें
तार तार हुए रिश्तों को
कोई फिर से भला अब क्यूँ सिले
चलो ई कार्ड ही लिख देते हैं
हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं
किसने कितना खर्च किया
ये सब दिमाग़ में रखते हैं
इंसान की नेकी नहीं चलती
इज़्ज़त हैसियत से करते हैं
हाँ हम नये दौर के रिश्ते है
व्हाट्सएप पे परिवार हैं बसते
यहीं से रिश्ते निभते हैं
होली दिवाली हर त्योहार
यहीं पर तो सब सजते हैं
हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं
जो व्हाट्सएप पे ना लिखे
वो क्या परिवार का हिस्सा हो
फ़ेसबुक , इंस्टा जिसे ना आये
उसका क्या कोई क़िस्सा हो
ऐसे रिश्तों को हम दरकिनार कर देते हैं
हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं
पहले मय्यत पर जाते थे
या फ़ोन पे सांत्वना देते थे
अब तो वो खेल भी ख़त्म हुआ
फ़ेसबुक पे ही नमन लिख देते हैं
हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं
Copyright Renu Vyas

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