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Thursday, February 02, 2023

नये दौर के रिश्ते



हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


मिलते नहीं अपनों से ज़्यादा 

दूर दूर ही रहते हैं

रिश्तेदारों पे शक करते

ख़ुद में ही सिमटे रहते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


जन्मदिन की शुभकामना भी

व्हाट्सएप पर लिख देते हैं

मन में ख़ुशी के भाव नहीं 

पर फ़र्ज़ अदा कर लेते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


विवाह पत्री भी हुई पुरानी 

अब इस बहाने भी क्यों मिलें

तार तार हुए रिश्तों को

कोई फिर से भला अब क्यूँ सिले

चलो ई कार्ड ही लिख देते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


किसने कितना खर्च किया

ये सब दिमाग़ में रखते हैं

इंसान की नेकी नहीं चलती

इज़्ज़त हैसियत से करते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते है


व्हाट्सएप पे परिवार हैं बसते

यहीं से रिश्ते निभते हैं

होली दिवाली हर त्योहार

यहीं पर तो सब सजते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


जो व्हाट्सएप पे ना लिखे 

वो क्या परिवार का हिस्सा हो

फ़ेसबुक , इंस्टा जिसे ना आये 

उसका क्या कोई क़िस्सा हो

ऐसे रिश्तों को हम दरकिनार कर देते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


पहले मय्यत पर जाते थे

या फ़ोन पे सांत्वना देते थे

अब तो वो खेल भी ख़त्म हुआ

फ़ेसबुक पे ही नमन लिख देते हैं

हाँ हम नये दौर के रिश्ते हैं


Copyright Renu Vyas

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