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Tuesday, May 27, 2025

गुलज़ार, नाना पाटेकर और मैं


कुछ अनुभव होते हैं जो शब्दों में बाँधने की कोशिश करो तो भी फिसल जाते हैं  - जैसे हवा में बसी महक, या किसी पुराने गीत की धुन जो सीधे दिल के किसी कोने को छू जाती है। गुलज़ार की कविता पढ़ना और नाना पाटेकर को बोलते हुए सुनना  - ये सिर्फ़ अनुभव नहीं, ये मेरे लिए एक पलायन है, एक ऐसी दुनिया का दरवाज़ा, जो सिर्फ़ मेरी है।


जब गुलज़ार लिखते हैं :

इक सफ़र है जो ख़त्म ही नहीं होता…”

तो लगता है जैसे उन्होंने मेरे ही दिल की तहों में उतरकर कुछ लिखा है। जैसे मेरी ही उलझनों को, मेरी ही चुप्पियों को शब्द दे दिए हों। उनकी हर नज़्म में कोई पुरानी याद, कोई भूला हुआ अहसास, कोई अधूरी बात मिलती है, जो अबतक सिर्फ़ मेरी थी।


और फिर जब नाना पाटेकर की भारी आवाज़ में वो शब्द सुनती हूँ —

कैसे बताऊँ मैं तुम मेरे लिए क्या हो…”

तो वो आवाज़, उन शब्दों के साथ मिलकर, किसी जादू की तरह मुझे मेरी ही दुनिया में पहुँचा देती है। एक ऐसी दुनिया जहाँ शोर नहीं है, बस भावनाओं की धीमी-धीमी सरगम है। जहाँ कोई मुझे समझता है, बिना कहे। जहाँ ये शब्द जैसे सीधे मेरे लिए बोले गए हों, मेरे अंदर गूँजने के लिए।


गुलज़ार के अल्फ़ाज़ और नाना पाटेकर की अदायगी मिलकर एक ऐसा कोना रचते हैं मेरी आत्मा में, जहाँ मैं सबसे ज़्यादा सच्ची होती हूँ। कोई मुखौटा नहीं, कोई भूमिका नहीं। बस मैं, मेरे एहसास, और वो शब्द जो जैसे मेरे लिए ही लिखे गए, मेरे लिए ही बोले गए।


ये मेरी दुनिया है - कल्पनाओं की, भावनाओं की, संवेदनाओं की। 


और फिर कभी-कभी… मैं बस आँखें बंद कर लेती हूँ, और अपने मन की आवाज़ में उनके लिए गाती हूँ —

“ये कहाँ आ गए हम यूँ ही साथ चलते चलते…”


जैसे मैं यह गीत गुलज़ार और नाना पाटेकर के लिए ही गा रही हूँ। मेरे दिल में, हम तीनों — मैं, गुलज़ार साहब और नाना — एक साथ एक लंबा सफ़र तय कर चुके हैं। एक ऐसी दुनिया की ओर जहाँ हर शब्द कविता बन जाता है, हर खामोशी आवाज़ हो जाती है, और हर एहसास को कोई कह देता है — कभी कागज़ पर, कभी आवाज़ में।


यह एक कल्पना है शायद, पर मेरे लिए यह पूरी तरह सच्ची है। एक जीवन हमने साथ जिया है — कागज़, आवाज़, और धुनों के माध्यम से। एक ऐसा जीवन, जो बाहर से नहीं दिखता, पर मेरे भीतर पूरी शिद्दत से जीया गया है।


शुक्रिया गुलज़ार साहब, शुक्रिया नाना पाटेकर — मेरी उस अदृश्य लेकिन सबसे सच्ची दुनिया को आकार देने के लिए।


Copyright Renu Vyas 

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