मैं माँ की ममता भरी मूरत हूँ
मैं हूँ बहिन का निःस्वार्थ प्यार
मैं प्रेमिका की शरारत हूँ
मैं बेटी का स्नेह और दुलार
कभी मैं चुपचाप सहने वाली
कभी हूँ काली का रूप
कभी पार्वती सी पूजी जाती
कभी लक्ष्मी का स्वरूप
कभी ना समझो वो रहस्य हूँ
कभी सीधी साधी बात
कभी नदी के चंचल वेग सी
कभी झील सी गहरी व शान्त
चंद शब्दों में ना वर्णन हो मेरा
शब्द भी मेरे लिए हैं अपर्याप्त
कितने क़िरदार बसते हैं मुझमें
मैं स्वयं में हूं पूरी क़ायनात
© Copyright Renu Vyas

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