चलो आज फिर से
थोड़ा हस लूँ
थोड़ी खिलखिलाऊँ
खो गयी जो बेफिक्री
उसे फिर से ढूंढ लाऊँ
माथे पे लकीरें जो
वक्त संग उभर आयी
पोंछ कर , गुम हुआ
सुक़ून फिर से ले आऊँ
बारिशों के पानी में
बहने दूं हर एक ग़म को
खुल के साँस लूं
हर बात पे मुस्कुराऊँ
क्यूँ सुनूँ मैं दुनिया की
क्यूँ हसरतें दबाऊँ
खुद से ही करूँ मुहोब्बत
खुद पे प्यार लुटाऊँ
ना कल की फ़िकर हो
ना दुनिया का डर
ज़िंदगी को बस
पल दर पल ज़िये जाऊँ
चलो आज फिर से
थोड़ा हस लूँ
थोड़ी खिलखिलाऊँ…
Copyright Renu Vyas

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