ना वास्ता तुमसे अब कोई
ना रिश्ता ही रहा है
मिलने की ना कोई उम्मीद बची
पर दिल फिर भी एक आस पे अड़ा है
छवि भी धुंधला चुकी
आवाज़ भूली सी जा रही
दर्द पर भी क़ाबू पा लिया
पर ज़ख्म आज भी हरा है
दिन गुज़रते हैं मशरूफ़ियत में
रातें भी निकल जाती हैं
पर तेरे हिस्से वाला वो एक पल
आज भी तन्हा सा ही गुज़रा है
©️ Renu Vyas

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