वो आईने वाली लड़की
पहले जब मिलती थी वो आईने में
तो चेहरे पे एक चमक होती थी
सपनों से भरी रहती थी आँखें भी
और आवाज़ में खनक होती थी
बालों को लहराती, सँवारती
होठों पे धीमी सी मुस्कान होती थी
आज जब दिखी तो मैं चौंक उठी
कुम्हलाया सा चेहरा लिये खड़ी थी
वीरान , बेजान सी आँखें उसकी
उदासी व बेबसी से भरी थी
आवाज़ जैसे गहरे कुएँ से आयी हो
ना जाने कैसी उलझनों में फसी थी
ख़ुद ही ख़ुद से कुछ बेगानी लगी
शायद वो एक तरफ़ा प्यार में पड़ी थी
Copyright Renu Vyas

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