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Tuesday, September 16, 2025

मुझे जानना हो तो..

 मुझे जानना हो तो


मुझे जानना हो तो,

यूँ ही मत पूछो मेरा नाम 

मेरी कविताओं में ढूँढ़ो मुझे,

उन अधूरी सी बातों के बीच के जज़्बातों में।


कभी मिलूँगी इक झलक बनकर

किसी छिपी हुई सी पंक्ति में,

या बनके ठहरी हुई साँस

दो मिसरों की दूरी में।


मैं शायद वो किरदार हूँ

जिसे तुमने नज़रअंदाज़ कर दिया,

जो चुपचाप हँसता रहा

और कुछ भी कह नहीं पाया।


या फिर वो अध्याय हो सकती हूँ

जिसे तुमने छोड़ दिया था बीच में,

जहाँ उदासी और तमन्ना

कभी शब्दों में सिमटी थी, कभी खामोशी में।


मैं मिलती हूँ अधूरे अंत में,

रुकी हुई किसी रेखा में,

एक शब्द और उसके अर्थ

के बीच की किसी रेखा में।


तो अगर सच में जानना है मुझे,

मेरी आँखों में मत देखो 

मेरी कहानियों में ढूँढ़ो मुझे,

जहाँ मैं सचमुच रहती हूँ,

बिन कहे सब कुछ कहती हूँ।


Copyright Renu Vyas 

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